Monday, July 11, 2016

अपने बच्चों को विदेश में पढ़ाते हैं, कश्मीर के युवाओं को आतंकी बनाते हैं अलगाववादी नेता


ये बातें के बारे में शायद कश्मीर के युवाओं ने सोचा ही नहीं होगा कि कश्मीर के अलगाववादी नेताओं के पास इतना सारा रूपया कहाँ से आता है, वे कैसे मालामाल होते जा रहे हैं, जिस देश में मर्जी होती है वहां पर सैर करने के लिए चले जाते हैं, उनकी जिन्दगी ऐशो आराम से भरी पड़ी हैं जबकि कश्मीर में गरीबी, बेरोजगारी और अशिक्षा का बोलबाला है, युवा आतंक के रास्ते पर जाने और सैनिकों की गोलियां खाकर मरने के लिए मजबूर किये जा रहे हैं।
















अगर आपने नहीं सोचा होगा तो अब सोच लीजिये, अगर नहीं सोच सकते तो पढ़ लीजिये, अलगाववादी नेताओं को कश्मीर के युवाओं को आतंकी बनाने के पैसे मिलते हैं, इन नेताओं को कश्मीर को अशांत करने के पैसे मिलते हैं, इन नेताओं को कश्मीर में बेरोजगारी बढाने के लिए पैसे मिलते हैं, इन नेताओं को कश्मीर में गरीबी और अशिक्षा बढाने के लिए पैसे मिलते हैं। इन नेताओं को कश्मीर में दंगा कराने, भारत के खिलाफ माहौल बनाने, आजादी की मांग करने के पैसे मिलते हैं।
आप पढ़कर हैरान हो जाएंगे कि ये अलगाववादी नेता उन पैसों से ऐशो आराम करते हैं, अपने बच्चों को विदेश की बड़ी बड़ी यूनिवर्सिटी में पढने के लिए भेज देते हैं, उन्हें अच्छी नौकरी दिलवाते हैं, उन्हें कश्मीर में रहने के लिए नहीं कहते, उन्हें विदेश में रहने के लिए कहते हैं और जब मर्जी होती है उनके पास घूम आते हैं।
ये अलगाववादी नेता अपने बच्चों को आतंकी नहीं बनाते, उन्हें हाफिज सईद के रास्ते पर चलने के लिए नहीं कहते, उन्हें तो ऐशो आराम की जिन्दगी जीने के लिए विदेशों में बसा दिया जाता है लेकिन कश्मीर के नादान, अशिक्षित, गरीब और बेरोजगार युवाओं को आतंक के रास्ते पर ढकेल दिया जाता है और उनके हाथों में ‘हमें चाहिए आजादी’ के बैनर थमा दिए जाते हैं, उन्हें सैनिकों पर पत्थरबाजी करने के लिए कहा जाता है। दरअसल उन्हें अशिक्षित, गरीब और बेरोजगार ही इसलिए रखा जाता है ताकि वे अलगाववादी नेताओं के अजेंडे पर काम करते रहें और उनकी तिजोरी में माल आता रहे।
अलगाववादी नेताओं को वे देश पैसे देते हैं जो नहीं चाहते कि भारत में शांति हो, भारत में विकास हो, भारत के लोग खुशहाल हों और भारत की ताकत बढे, उदाहरण के लिए चीन कभी नहीं चाहेगा कि भारत में विकास हो, भारत में वस्तुओं का उत्पादन होना शुरू हो जाए, अगर भारत अपनी जरूरत का सामान खुद बनाने लगेगा तो चीन में भुखमरी आ जाएगी क्योंकि चीन का सबसे बड़ा बाजार भारत है।
भारत के दुश्मन देश जैसे चीन और पाकिस्तान कश्मीर में इसलिए अशांति और आतंक फैलाते हैं ताकि भारत अपनी सेना कश्मीर में लगाए रखे, सैनिकों पर बेतहाशा रुपये खर्च करता रहे ताकि वो पैसे विकास में ना लग पाएं, ये देश चाहते हैं कि भारत विकास के बजाय ज्यतादातर पैसा अपनी सैन्य ताकत बढाने में लगा दे ताकि देश में गरीबी, बेरोजगारी और अशिक्षा बनी रहे, ये देश चाहते हैं कि भारत विकास के बजाय अपनी सारी ताकत आतंक से लड़ाई लड़ने के लगा दे।
इसी मकसद के लिए ये देश अलगाववादी नेताओं को मोटी रकम देकर उन्हें कश्मीर के युवाओं को आजादी के नाम पर भड़काते हैं, उन्हें पढने के बजाय आतंक के रास्ते पर ढकेल देते हैं, उन्हें नौकरी करने के बजाय इस्लाम के नाम पर कुर्बान हो जाने के लिए कहते हैं और वे नादान युवा अलगाववादी नेताओं के बहकावे में आकर मारे जाते हैं, वे आजादी देखने से पहले ही आजाद हो जाते हैं, उनके माँ-बाप अपनी संतानों को मरता देखकर खून के आंसू बहाते रहते हैं।
आप देख लेना, जब कश्मीर का युवा शिक्षित हो जाएगा, नौकरी करने लगेगा, दंगा-फसाद छोड़ देगा, आतंक के रास्ते पर जाना छोड़ देगा, अपने भविष्य के जीना शुरू कर देगा, मेहनत करने लगेगा, कुछ ही समय बाद अलगाववादी नेता भूखों मरने लगेंगे, हाफिज सईद जैसे आतंकियों को को हार्ट अटैक आ जाएगा और ये अपने आप मर जाएंगे। ये सब अपने आप नहीं होगा, पहले अलगाववादी नेताओं की चालाकी को समझना होगा, आतंकी हाफिज सईद की चाल को समझना होगा, आतंक के रास्ते को छोड़ना होगा। कश्मीर के युवाओं को पता नहीं है कि भारत से आजाद होने के बाद वो या तो कश्मीर में कैद हो जाएंगे या पाकिस्तान कश्मीर पर कब्जा कर लेगा, इनके बाद तो कश्मीर में आतंक का नंगा नाच होगा।

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