Saturday, August 27, 2016

दलित-पिछड़े राष्ट्रवादी नहीं और राष्ट्रवादियों के अलावा कोई भाजपा के साथ नहीं

नई दिल्ली :  प्रधानमंत्री के मंगलवार को बीजेपी कोरग्रुप की बैठक में दिए बयान पर दलितों और पिछडों में तीखी प्रतिक्रिया हो रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रवादी तो भाजपा के साथ पहले से ही हैं, लेकिन दलितों और पिछड़ों को साथ में लाने की जरूरत है।  विपक्षी दलों और सामाजिक चिंतकों ने इस बयान को पिछड़़ों और दलितों का अपमान बताया है क्योंकि इस बयान का सीधी मतलब यही है कि प्रधानमंत्री दलितों और पिछड़ों को राष्ट्रवादी नहीं मानते और उनकी निगाह में केवल सवर्ण ही राष्ट्रवादी हैं।
राहुल गांधी ने मोदी के बयान पर ट्विट करके उनसे पूछा है कि क्या दलित और पिछड़े राष्ट्रवादी नहीं हैं। 
सोशल मीडिया पर तो प्रधानमंत्री के इस बयान की जमकर खिंचाई हो रही है। फेसबुक पर तरह-तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं और तंज कसे जा रहे हैं। वरिष्ठ पत्रकार और सामाजिक चिंतक दिलीप मंडल ने लिखा है- कार के नीचे कुत्ते का बच्चा वाला बयान छोड़ दें तो नरेंद्र मोदी जी ने इतना अपमान तो मुसलमानों का भी नहीं किया था। शुक्रिया नरेंद्र मोदी, यह बताने के लिए कि एससी और ओबीसी की आपकी नजर में क्या औकात है।
अरविंद शेष ने लिखा है- अब इससे ज्यादा साफ-साफ मोदी जी और क्या कहेंगे कि 'सवर्ण' उनके साथ हैं और बाकी बचे पिछड़े और दलित, तो उन्हें वे अपने साथ लाने की कोशिश करेंगे। यानी वे यह मानते हैं कि- राष्ट्रवादी का मतलब सवर्ण!
राजेश यादव ने चुटकी लेते हुए लिखा है- भारत के 69% लोग राष्ट्रद्रोही होते हैं ,ये 2014 के पहले के आंकड़े हैं .. अभी हाल ही में इस संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है | 
जितेंद्र नारायण ने लिखा है-अब तो प्रधानमंत्री ने ही स्पष्ट कर दिया कि पिछड़े और दलित अलग जातियाँ हैं और राष्ट्रवादियों की अलग जाति है...बेचारे पिछड़े-दलित भाजपाई न घर के हैं न घाट के....!!!
कमलेश कुमार ने लिखा है-इससे ज्यादा शर्म की बात और क्या होगी कि देश का प्रधानमंत्री सरेआम देश के 85% दलित पिछड़े और मुस्लिमो को देशद्रोही बोल रहा है।
प्रभाकर भारतीय ने पूछा है- मोदी के अनुसार राष्ट्रवादी की परिभाषा क्या है ? क्या केवल संघी और मनुवादी ही राष्ट्रवादी हैं ?
भाजपा की तरफ से अभी तक प्रधानमंत्री के इस बयान के बारे में कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

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