Saturday, March 25, 2017

Gilgit Baltistan is a part of Jammu Kashmir - UK parliament

गिलगित-बाल्तिस्तान जम्मू-कश्मीर का हिस्सा, इस पर PAK का कब्जा गैरकानूनी: UK



नई दिल्ली/लंदन. ब्रिटिश पार्लियामेंट ने एक प्रस्ताव पास कर गिलगित-बाल्तिस्तान पर पाकिस्तान के कब्जे को गैरकानूनी करार दिया है। प्रस्ताव में इसे पाकिस्तान द्वारा अपना 5वां प्रोविंस घोषित करने की तैयारी की भी आलोचना की गई है। पार्लियामेंट ने कहा है, "गिलगित-बाल्तिस्तान भारत के जम्मू-कश्मीर का लीगल और कॉन्स्टिट्यूशनल पार्ट है।" लोगों को फंडामेंटल राइट्स से महरूम कर रखा है पाक ने...
- न्यूज एजेंसी के मुताबिक ब्रिटिश पार्लियामेंट में इस प्रस्ताव को 23 मार्च को पेश किया गया। कंजर्वेटिव पार्टी के लीडर बॉब ब्लैकमैन ने इसका सपोर्ट करते हुए कहा, "पाकिस्तान गिलगित-बाल्तिस्तान को 5वां प्रोविंस घोषित करने की तैयारी कर पहले से विवादित एरिया को अपने में शामिल करने की कोशिश कर रहा है। जबकि उसने इस पर 1947 से गैरकानूनी ढंग से कब्जा कर रखा है।"
- प्रस्ताव में साफ तौर पर कहा गया है कि, "पाकिस्तान ने गिलगित-बाल्तिस्तान के लोगों को उनके फंडामेंटल राइट्स और राइट ऑफ फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन से महरूम कर रखा है।"
प्रस्ताव में और क्या?
- ब्रिटिश पार्लियामेंट ने प्रस्ताव में यह भी कहा है कि गिलगित-बाल्तिस्तान की डेमोग्राफी (जनसांख्यिकी) में बदलाव की कोशिश को स्टेट ऑब्जेक्ट ऑर्डिनेंस का वॉयलेशन माना जाएगा। चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) के तहत वहां किसी भी कंस्ट्रक्शन को विवादित एरिया में हस्तक्षेप समझा जाएगा।
ये हैं पाक के 4 प्रोविंस
- बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा, पंजाब और सिंध पाकिस्तान के 4 प्रोविंस हैं। पाकिस्तान में गिलगित-बाल्तिस्तान को एक अलग ज्योग्राफिक रीजन माना जाता है। वहां असेंबली और एक चुना हुआ सीएम भी है। पीएम नवाज शरीफ के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज की अगुआई वाली कमेटी ने गिलगित-बाल्तिस्तान को 5वां प्रोविंस घोषित करने का प्रस्ताव रखा है।
भारत का क्या कहना है?
- भारत के केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने शुक्रवार को कहा था, "पीओके और गिलगित-बाल्तिस्तान पर पाकिस्तान का कब्जा गैरकानूनी है, भारत की मांग है कि पाकिस्तान इन इलाकों को खाली कर दे। आज अगर दोनों देशों के बीच जम्मू और कश्मीर को लेकर कोई विवाद है तो वह सिर्फ पीओके और गिलगित-बाल्तिस्तान पाकिस्तान का अवैध कब्जा है। इन्हें किस तरह पाकिस्तान के कब्जे से मुक्त करा कर इंडियन डेमोक्रेसी का हिस्सा बनाया जाए, सिर्फ यही एक मुद्दा है।" 
- सिंह ने कहा था, "इस बारे में कई साल से भारत की स्थिति बेहद साफ रही है, इस बारे में 1994 में संसद में एक प्रस्ताव पास किया गया था, जिसका सभी राजनीतिक दलों ने सपोर्ट भी किया था।"
नई दिल्ली के लिए चिंता की वजह
- 51.5 अरब डॉलर की कॉस्ट से बनने वाला चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) गिलगित-बाल्तिस्तान से होकर गुजरेगा। माना जा रहा है कि पाकिस्तान ने यह कदम चीन की चिंताओं को देखते हुए उठाया है। पाक को इस क्षेत्र का दर्जा बदलने के लिए कॉन्स्टिट्यूशन में अमेंडमेंट करना होगा। 
- चूंकि यह इलाका पाकिस्तान के कब्जे वाले पीओके से सटा हुआ है। ऐसे में भारत के लिए पाकिस्तान का यह कदम चिंता की बड़ी वजह है। भारत CPEC प्रॉजेक्ट पर भी कई बार एतराज जता चुका है। नई दिल्ली ने कहा है कि यह कॉरिडोर पीओके और गिलगित-बाल्तिस्तान से गुजरने के चलते भारत की sovereignty का वॉयलेशन है।
चीन का क्या कहना है?
- चीन की फॉरेन मिनिस्ट्री के स्पोक्सपर्सन ने कहा है कि बीजिंग, इस्लामाबाद के साथ इस मुद्दे पर काम करने को तैयार है कि CPEC का किस तरह दोनों देशों (भारत-पाक) के लोग फायदा उठा सकें।


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