Sunday, March 26, 2017

Story of winner of Bharat Kesri Dangal female wrestler - Divya Kakran

बेटी के लिए मां ने बेचे मंगलसूत्र, ग्लूकोज पीकर ऐसे लड़ती है अखाड़े में फाइट




अंबाला (हरियाणा).कहते हैं कि तकदीर बदलते देर नहीं लगती। ऐसा ही कुछ हुआ संघर्ष की आग में तप रही महिला पहलवान दिव्या काकरान के साथ। वार हीरोज मेमोरियल स्टेडियम में चल रही एक करोड़ की दंगल चैंपियनशिप में साधारण परिवार की इस महिला ने प्लस वेट केटेगरी में विरोधी पहलवान को चंद मिनटों में ही धूल चटाकर इतिहास रच दिया।दिव्या काकरान अब देश की सबसे ताकतवर महिला पहलवान बन गई हैं। बता दें कि दिव्या की मां ने उन्हें रेसलर बनाने के लिए अपना मंगलसूत्र तक बेच दिया था। लंगोट (कुश्ती में पहनी जाने वाली ड्रेस) बेचकर पिता चलाते हैं परिवार...

-1990 के दशक में दिव्या के पिता सूरज कुश्ती में करियर बनाने के लिए दिल्ली आए थे, लेकिन सफलता नहीं मिली।
-कुछ समय बाद सूरज गांव लौट गए। शादी की और दूध बेचने का बिजनेस शुरू किया। जल्द ही ये बिजनेस भी फेल हो गया।
-पत्नी और दो बच्चों के साथ सूरज फिर ईस्ट दिल्ली के गोकुलपुर लौटे। नया बिजनेस डाला।
-पत्नी संयोगिता लंगोट (कुश्ती में पहनी जाने वाली ड्रेस) सिलने का काम करने लगीं। सूरज इसे दंगल में बेचा करते थे।
-पांच साल की दिव्या अपने भाई के साथ अखाड़ा जाती थीं। एक कोने में बैठकर दिव्या रेसलर्स के मूव को कॉपी करती थीं।
- बता दें कि एक बार नेशनल गेम्स के लिए दिव्या को एक लाख रुपये की जरूरत थी। उस वक्त उनकी मां को अपना मंगलसूत्र, कुंडल व अन्य गहने गिरवी रखने पड़े।
- हालांकि बाद में दिव्या ने दंगल जीतकर उन गहनों को वापस छुड़ा लिए।
15 रुपए के ग्लूकोज पीकर दंगल में उतरने वाली दिव्या बनी सबसे ताकतवर महिला
- दिव्या ने एक इंटरव्यू में बताया था कि वह मात्र 15 रुपए का ग्लूकोज पीकर दंगल लड़ती हैं। जिसके बाद कई लोग दिव्या की आर्थिक मदद के लिए आगे आए थे।
- सैन समाज ने इस बेटी को खेलों के मामले में गोद लिया था और उसकी डाइट का जुगाड़ करने में बहुत मदद की।
भाई को देखकर सीखा
-दिव्या के पिता रेसलर नहीं बन सके इसलिए उन्होंने अपने बेटे देव को ये खेल सिखाया।
-बड़े भाई को बचपन से ही दिव्या ने इस खेल में देखा। खुद भी अखाड़े के बाहर खड़ी होकर घंटों उन्हें देखा करती थीं।
-8 साल की उम्र से ही इस खेल में दिव्या का मन लगने लगा। लेकिन उनका टैलेंट तब सामने आया जब 2010 में उन्होंने एक लड़के को हराया।
क्यों अलग हैं दिव्या
-यूं तो भारत में गीता फोगाट और बबिता कुमारी जैसी रेसलर हैं, लेकिन दिव्या उनसे अलग हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि दिव्या लड़कों से फाइट करने के लिए मशहूर हैं।
-वो अब तक कई लड़कों को अखाड़े में हरा चुकी हैं। मजबूत कंधे और माथे पर बिखरे बाल के कारण दिव्या दिखने में भी लड़कों जैसी ही लगती हैं।

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